कैसे पता चलेगा डिलीवरी नार्मल होगा कि सिजेरियन। नॉर्मल डिलीवरी कैसे होती है। normal delivery ke lakshan.

कैसे पता चलेगा डिलीवरी नार्मल होगा कि सिजेरियन

हेलो, दोस्तों आज हम आपको यह बताइए कि कैसे पता चलेगा कि डिलीवरी नार्मल होगा कि सिजेरियन । यदि आप इस सवाल का जवाब खोज रहे हैं तो आप हमारे द्वारा लिखे इस लेख के माध्यम से आसानी से जान सकते हैं कि कैसे पता चलेगा डिलीवरी नार्मल होगा कि सिजेरियन। आज हम आपको इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान करेंगे ।

यदि आप गर्भवती महिला हैं, और आप सोच रही है कि कैसे पता चलेगा डिलीवरी नार्मल होगा कि सिजेरियन? नॉर्मल डिलीवरी में टांके ना के बराबर लगते हैं, इसके अलावा मां और बच्चा दोनों को इंफेक्शन का खतरा कम रहता है और गर्भवती महिला की रिकवरी जल्दी होती हैं। इसीलिए हर कोई  महिला नॉर्मल डिलीवरी की चाहत रखती है। परंतु हर एक गर्भवती महिला की डिलीवरी बच्चेदानी की परिस्थिति तथा यूट्रस की स्थिति को समझ कर की जाती है। जिसके बाद डिलीवरी नॉरमल होगी कि सिजेरियन इस बात का पता चलता है।

नॉर्मल डिलीवरी गर्भवती महिला के स्वास्थ्य के लिए अधिक फायदेमंद होती हैं, परंतु कुछ ऐसे कारण उत्पन्न हो जाते हैं।  जिसके कारण सिजेरियन डिलीवरी करना आवश्यक हो जाता हैं। सिजेरियन डिलीवरी के मुकाबले नॉर्मल डिलीवरी करना अधिक फायदेमंद होता हैं। लेकिन यह जाने के लिए की डिलीवरी नार्मल होगी या सिजेरियन  कई बातों को ध्यान रखना जरूरी होता हैं। जैसे कि बच्चे का वजन कितना है, बच्चे की हालत कैसी है, बच्चेदानी का मुंह कितना खुला हुआ हैं इत्यादि कई प्रकार की बातों को ध्यान में रखते हुए मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए कौन सी डिलीवरी करना सही रहेगा इस बात का पता किया जाता है, जिसके बाद डॉक्टर नॉर्मल डिलीवरी तथा सिजेरियन डिलीवरी करने की सलाह देते हैं। तो चलिए जानते हैं, की कैसे पता करे डिलीवरी नार्मल होगा कि सिजेरियन के बारे में। 

  • कैसे पता चलेगा डिलीवरी नार्मल होगा कि सिजेरियन।

अधिकांश महिलाएं नॉर्मल डिलीवरी करना पसंद करती हैं। लेकिन कई ऐसे कारण होते हैं, जिसकी वजह से डॉक्टरों को अचानक सिजेरियन डिलीवरी करनी पड़ती हैं। हर महिलाओं की प्रेगनेंसी अलग- अलग प्रकार की होती है। परंतु बच्चे की सुरक्षा के लिए प्रेग्नेंट महिला को यह बातें समझना जरूरी होता है की कौन सी अवस्था में नार्मल डिलीवरी की जाती है तथा कौन सी अवस्था में सिजेरियन डिलीवरी की जाती है, तो चलिए, इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानते हैं।

हर कोई महिला नॉर्मल डिलीवरी चाहती है। परंतु डिलीवरी नॉरमल होगी कि सिजेरियन यह बात जानने के लिए बच्चेदानी में मौजूद बच्चे की पोजीशन बेहद जरूरी होती है। बच्चे की पोजीशन ही इस बात को सिद्ध करती हैं, की गर्भवती महिला की डिलीवरी नॉर्मल डिलीवरी या सिजेरियन।

  • नॉर्मल डिलीवरी के लिए बेबी का पोजीशन।

कैसे पता चलेगा डिलीवरी नार्मल होगी कि सिजेरियन। इस सवाल का जवाब यदि आप भी जाना चाहती हैं, तो आप आसानी से जान सकती हैं । यदि गर्भवती महिला की नार्मल डिलीवरी करनी है, तो ऐसे में बच्चे का नार्मल पोजीशन में होना जरुरी होता है। Normal Position में बच्चे का सिर यूट्रस की तरफ होना और इसके आलावा योनी का मूहँ अच्छे से खुला हुआ होना बेहद जरुरी होता है।

इन अवस्था में नॉर्मल डिलीवरी की जाती हैं (Condition for normal delivery) 

कैसे पता चलेगा डिलीवरी नार्मल होगा कि सिजेरियन तथा  नॉर्मल डिलीवरी कैसे होती है या सवाल अक्सर कहीं महिलाओं  द्वारा पूछा जाता है।

नॉर्मल डिलीवरी को प्राकृतिक डिलीवरी भी कहा जाता हैं। नॉर्मल डिलीवरी तब होती हैं, जब डिलीवरी के दौरान नीचे वजाइना में बिना कट लगाये बच्चे को यौनी से बाहर निकला जाता हैं। तब उसे नार्मल डिलीवरी कहते है। लेकिन नॉर्मल डिलीवरी में सिजेरियन डिलीवरी के मुकाबले दर्द ज्यादा होता हैं। तो आइये जानते हैं, नॉर्मल डिलीवरी करना किन परिस्थिति में संभव हैं। 

महिला की किन परिस्थितियों में नॉर्मल डिलीवरी करना संभव होता हैं। 

 बच्चेदानी का मुंह खूलना तथा चौड़ा होना भी नॉर्मल डिलीवरी के ही संकेत होते हैं, परंतु यह सिर्फ डॉक्टर द्वारा चेक किया जा सकता है।

यदि प्रेगनेंसी के आखिरी 4 हफ्ते में पेट के निचले हिस्से में दर्द होना, ऐठन महसूस होना । यह भी नॉर्मल डिलीवरी होने का ही लक्षण होता हैं। 

 यदि गर्भवती महिला को दर्द होना शुरू होता है और महिला के यौन का ऑस (OS) अच्छे से ओपन हो रहा है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर द्वारा इंजेक्शन देकर बच्चेदानी का मुंह खोलकर, नॉर्मल डिलीवरी की जाती है।  

नॉर्मल डिलीवरी के लिए बच्चेदानी में मौजूद बच्चे की पोजीशन का सही होना जरूरी है। यदि बच्चे का  सिर जीवनी की तरफ निचे झुका हुआ है और पैर ऊपर की ओर हैं, इसके अलावा योनी का मूहं अच्छे से खुला हुआ है, ऐसे में नॉर्मल डिलीवरी की जाती है।

यदि बच्चे का वजन 4 किलो से कम है तो एेसे में नॉर्मल डिलीवरी कि संभावना अधिक बढ जाती हैं।  

 अगर प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में प्राइवेट पार्ट से गाढ़ा डिस्चार्ज (गाढ़ा द्रव) निकल रहा है तो यह नॉर्मल डिलीवरी के संकेत होते हैं। 

 बार बार यूरिन आना यह नार्मल डिलीवरी के लक्षण होते है। असल में 9 वे महीने में जब पेट के अंदर का बच्चा श्रोणि क्षेत्र में आने लगता हैं। ऐसे में वह मूत्राशय पर दबाव डालता हैं, जिसके कारण बार-बार यूरिन आती हैं। ऐसे में भी नॉर्मल डिलीवरी की संभावना ज्यादा होती है।  

  • सिजेरियन डिलीवरी कब की जाती हैं।

कैसे पता चलेगा डिलीवरी नार्मल होगा कि सिजेरियन तथा सिजेरियन डिलीवरी कैसी होती है यह सवाल अक्सर गर्भवती महिला के मन में रहता है। यदि नॉर्मल डिलीवरी करने में परेशानी आ रही है ऐसे में डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी की सलाह देते हैं। सिजेरियन डिलीवरी में यौनी से ऊपर के हिस्से तक कट लगाकर बच्चे को बाहर निकाला जाता है। तो आइए जानते हैं, किन परिस्थितियों में सिजेरियन डिलीवरी की जाती हैं।

  • महिला की किन परिस्थितियों में सिजेरियन डिलीवरी करना संभव होता हैं। 

नॉर्मल डिलीवरी में कई बार बच्चेदानी का मुंह नहीं खुलता हैं। और बच्चा अंदर की ओर जाने लगता हैं। ऐसी कंडीशन में डॉक्टर को सिजेरियन डिलीवरी करनी पड़ती है। 

यदि डिलीवरी होने में समय है, लेकिन पेट में पल रहे बच्चे ने बच्चेदानी में गंध (Meconium) कर दी हैं। ऐसे में यह मैकोनियम बच्चे के मुंह से अंदर जाने का खतरा रहता हैं। जिससे बच्चे को इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता हैं। जिसके कारण ऐसी परिस्थिति में सिजेरियन डिलीवरी की जाती है।

 अक्सर बच्चेदानी में बच्चे की पोजीशन अलग-अलग प्रकार की पाई जाती है, परंतु यदि बच्चेदानी में बच्चे की पोजीशन आड़ी (Transverse Position) है तथा योनि के पास बच्चे का पिछला हिस्सा आ जाता हैं, इस प्रकार की पोजीशन में ऑपरेशन द्वारा कट लगाकर डिलीवरी की जाती है। 

यदि बच्चेदानी में मौजूद पानी की मात्रा खतम हो जाती है। ऐसे में बच्चे के दिल की धड़कन बढ़ जाती है ,और बच्चे की जान जाने का खतरा होता है, ऐसी परिस्थिति में बिना देरी किए सिजेरियन डिलीवरी करना जरूरी होता है।

यदि प्रेग्नेंट महिला की योनि से बच्चे की गर्भनाल बाहर की और दिखाई दे रही हैं। ऐसे में बच्चे को रक्त की आपूर्ति होना बंद हो जाता हैं। जो कि एक विकट परिस्थिति होती हैं। ऐसे में बच्चे की जान जाने का खतरा होता है, इस प्रकार की परिस्थिति में बिना देरी किए सिजेरियन डिलीवरी की जाती है ताकि बच्चा सुरक्षित रह सके। 

यदि यूट्रस तथा वजाइना में किसी तरह की कोई रुकावट है, तथा श्रोणि की हड्डी छोटी हैं। ऐसे में बच्चे को बच्चेदानी से निकालना मुश्किल होता हैं
। ऐसी परिस्थिति में  नॉर्मल डिलीवरी करना मुश्किल हो जाता हैं। ऐसे में सिजेरियन डिलीवरी करनी पड़ती है।

अत : अब तो आप समझ ही गए होंगे, कि कैसे पता चलेगा डिलीवरी नार्मल होगा कि सिजेरियन।

9 महीने में डिलीवरी लक्षण। delivery symptoms in 9th month in hindi.

दोस्तों, क्या आप जानते हैं कि 9 महीने में डिलीवरी लक्षण (delivery symptoms in 9th month in hindi)के बारे में। यदि आप इसके बारे में नहीं जानते हैं तो आज हम आपको यह बताएंगे कि आप किस प्रकार से 9 महीने में डिलीवरी लक्षण (delivery symptoms in 9th month in hindi) के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप इसके बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप नीचे दी गई जानकारी को पूरा लास्ट तक जरूर पढ़ें।

यदि आप पहली बार प्रेग्नेंट हुई हैं। ऐसे में आपके मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि मुझे कैसे पता चले की मेरी अभी डिलीवरी होने वाली हैं।

हर एक प्रेग्नेंट स्त्री को ये जानना जरुरी हैं की लेबर पेन्स (Labour Pains) कैसे होते है।

सबको Delivery कि एक अनुमानित तारीख दी जाती है। लेकिन बहुत ही कम गर्भवती स्त्री की उस Date पे डिलीवर हो पाती हैं।

डॉक्टर के Date देने के बावजूद भी कभी सातवें महीने में डिलीवरी होती हैं, तो कभी आठ महीने पुरे होने पर डिलीवरी हो जाती हैं। और कभी 9 महीने पुरे होने के बाद भी डिलीवरी नहीं होती। तो इस परिस्थिति आप कैसे पहचानेंगे की जल्दी ही डिलीवरी का Pain शुरू हुआ तो हमे कैसे पहचानना हैं आइए जानते हैं।

1) कभी- कभी ब्लीडिंग शुरू हो जाती है।

2) लेबर पेन शुरू हो जाता हैं।

3) योनि से पानी आ जाता है।

4) कमर में तेज दर्द होना।

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नॉर्मल डिलीवरी कैसे होती है। normal dilevri kese hoti he.

normal delivery kaise hota hai : दोस्तों, यदि आप भी यह जानना चाहते हैं, की सामान्य प्रसव अर्थात Normal Delivery kaise hoti hai (normal delivery kaise hoti hai in hindi ) के बारे में जानना चाहते हैं। तो आप तो आसानी से हमारे द्वारा दी गई जानकारी के माध्यम से स्टेप बाय स्टेप जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।


normal dilevari kese hoti he :-

1) लेटेंट प्रक्रिया । 

नॉर्मल डिलीवरी (सामान्य प्रसव) normal dilevri kese hoti he में लेटेंट की प्रक्रिया बहुत लम्बे समय तक चलती है। इसमें गर्भाशय ग्रीवा 2-3 सेंटीमीटर तक खुल सकती हैं। यह प्रक्रिया डिलीवरी के एक सप्ताह पहले या डिलीवरी के कुछ घंटों पहले शुरू हो सकती हैैं। इस दौरान गर्भवती महिला को बीच-बीच में संकुचन भी हो सकते हैं।

एक्टिव (active) प्रक्रिया ।

 एक्टिव (active) प्रक्रिया में गर्भाशय ग्रीवा 3-7 सेंटीमीटर तक खुल जाती है। इस दौरान संकुचन की वजह से तेज दर्द होता है ।

ट्रांजिशन प्रक्रिया ।

 ट्रांजिशन प्रक्रिया में गर्भाशय ग्रीवा 8-10 सेंटीमीटर तक खुल जाती हैं।

इस दौरान संकुचन लगातार होते रहते हैं और दर्द भी बढ़ जाता हैं।

2) बच्चे का बहार आना।

इसमें गर्भाशय की ग्रीवा पूरी तरह से खुल जाती हैं।संकुचन की गति और तेज हो जाती हैं। इस में शिशु का शिर एकदम निचे की और आ जाता हैं। इस समय डॉक्टर महिला को जोर लगाने के लिए कहते हैं। जिस से शिशु का शिर बहार आ जाता हैं और फिर डॉक्टर शिशु के बाकी शरीर को खिंच के बहार निकल लेते हैं।

3) गर्भनाल बहार आना।

शिशु के बहार आने के बाद डॉक्टर्स शिशु की गर्भनाल काट कर अलग कर देते है । इस में महिला के गर्भाशय में मोजूद प्लेसेंटा बहार निकलती हैं। शीशु के जन्म के बाद प्लेसेंटा गर्भाशय से अलग होने लगती है ,और इस वक्त भी महिला को संकोचन होता हैं। इस प्रक्रिया में 30 मिनट का समय लग सकता हैं। इसको बहार निकलने के लिए भी डॉक्टर महिला को स्वयं से जोर लगाने के लिए बोलते हैं।

  • नार्मल डिलीवरी में कितना समय लगता है?

नार्मल डिलीवरी का समय महिला की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता हैं। यदि महिला की पहली बार डिलीवरी हो रही है तो 8 घंटे से लेकर 20 घंटे तक का समय लग सकता हैं। और यदि डिलीवरी दूसरी बार हो रही हो तो कम समय लगता हैं। इसके अलावा डॉक्टर की उपस्थिति में डिलीवरी की प्रक्रिया अधिक जल्दी भी संपन्न कराई जा सकती हैं।

नार्मल डिलीवरी में दर्द।

दोस्तों, क्या आप जानते हैं की नार्मल डिलीवरी में दर्द के बारे में। यदि आप नहीं जानते हैं, तो आज हम आपको बताएंगे कि नार्मल डिलीवरी में दर्द के बारे में संपूर्ण जानकारी।।

नॉर्मल डिलीवरी तब होती है जब डिलीवरी के दौरान नीचे वजाइना में बिना कट लगाये बच्चे को यौनी से बाहर निकला जाता है तब उसे नार्मल डिलीवरी कहते है। अक्सर महिलाओं के मन में यही सवाल आता रहता है कि नार्मल डिलीवरी में दर्द अधिक होता है या फिर सिजेरियन डिलीवरी में । हालांकि नॉर्मल डिलीवरी में सिजेरियन डिलीवरी के मुकाबले दर्द ज्यादा होता है, परंतु यह एक्सएफ डिलीवरी मानी जाती है। इसके अलावा नॉर्मल डिलीवरी में मां और बच्चा दोनों को इंफेक्शन का खतरा कम रहता हैं, और गर्भवती महिला की रिकवरी जल्दी होती हैं।

डिलीवरी होने के लक्षण।delivery hone ke lakshan.

क्या आप जानते हैं कि डिलीवरी होने के लक्षण
(pregnancy me delivery ke lakshan in hindi) के बारे में । यदि आप नहीं जानते हैं, आप मेरे द्वारा दी गई जानकारी के माध्यम से आसानी से जान पाएंगे कि delivery hone ke lakshan क्या होते हैं।

प्रत्येक प्रेग्नेंट महिला यह विचार करती हैं, कि डिलीवरी डेट के आसपास प्रसव पीड़ा अचानक से शुरू हो जाती हैं। लेकिन ऐसा नहीं है, किसी भी महिला के लिए यह नहीं कहा जा सकता है कि उन्‍हें लेबर पेन कब शुरू होगा। हालांकि, लेबर पेन अचानक से शुरू नहीं होता हैं। बल्कि इसके कुछ घंटे पहले से ही शुरुआती संकेत मिलने शुरू हो जाते हैं।

अधिकतर महिलाएं इन संकेतों को नजरअंदाज कर देती हैं। जिससे उन्‍हें पता ही नहीं चल पाता है, कि उन्‍हें लेबर पेन शुरू होने वाला है। कुछ ऐसे संकेत जो प्रसव पीड़ा शुरू होने से 24 से 48 घंटे पहले मिलते हैं। अगर आप अपने शरीर में मिल रहे संकेतों पर ध्‍यान दें, तो समझ जाएंगी कि अब आपकी डिलीवरी होने में बस कुछ ही घंटे बचे हैं।

  • पेशाब बार-बार आना।

डिलीवरी के लिए बच्‍चे का सिर नीचे योनि की ओर आ जाता है। जब बच्‍चा इस पोजीशन में शिफ्ट होगा, आपको पता चल जाएगा। इससे फेफड़ों पर पड़ रहा थोड़ा दबाव कम होता है और मूत्राशय पर भार बढ़ जाता है। शिशु का सिर नीचे योनि की ओर आने की वजह से पेशाब करने की इच्छा बढ़ जाती है।

लेबर शुरू होने पर आपको मल त्‍याग करने की जरूरत महसूस हो सकती है। चूंकि, इस समय आपको लेबर पेन भी शुरू हो रहा होता है, इसलिए आप इन दोनों के बीच के दर्द को समझ नहीं पाती हैं।लेबर शुरू होने पर महिलाओं को खाली पेट रहने की सलाह दी जाती है। अगर आप इस समय मल त्‍याग कर लेती हैं, तो पेल्विक हिस्से में शिशु के लिए जगह बन जाती है।

  • मरोड़ होना।

गर्भावस्था के अंतिम दिनों में पेट में होने वाला दर्द या मरोड़ आना भी डिलीवरी होने का लक्षण हैं।

  • म्‍यूकस प्‍लग निकलना।

प्रेग्‍नेंसी के दौरान गर्भाशय ग्रीवा में म्‍यूकस प्‍लग बनता है। यह एक मोटा चिपचिपा प्‍लग होता हैं, जो गर्भाशय ग्रीवा में नमी बनाए रखने और उसे बैक्‍टीरिया से बचाने के लिए बनता है। डिलीवरी डेट आने पर गर्भाशय ग्रीवा चौड़ी होनी शुरू हो जाती है।

इस प्रक्रिया में म्‍यूकस प्‍लग ढीला होता है और अपने आप निकल जाता है। यह भूरा, हल्का गुलाबी या हल्‍के से खून के धब्‍बे के रूप में हो सकता है। म्‍यूकस प्‍लग निकलने के कुछ दिन या हफ्ते बाद ही आपकी डिलीवरी हो सकती है।

  • पानी की थैली फटना।

प्रेग्‍नेंसी के दौरान गर्भ में भ्रूण एमनिओटिक फ्लूइड की एक थैली से ढका होता है। यह शिशु को सुरक्षित रखने के लिए होती है। लेबर की शुरुआत में यह थैली फट जाती है और इसका पानी बाहर आ जाता है। पानी की थैली फटने के तुरंत बाद आपको हॉस्पिटल चले जाना चाहिए।

  • कमर में तेज दर्द हो जाना।

शिशु का सिर नीचे की ओर आने की वजह से कमर दर्द बढ़ने लगता है। लेबर के दौरान शिशु के सिर की वजह से मां के की रीढ़ की हड्डी के तले में स्थित छोटी-सी हड्डी पर दबाव पड़ता है। इसके कारण पीठ में बहुत तेज दर्द होता है।

डिलीवरी से कुछ समय या दिन पहले पेट में संकुचन होना शुरू हो जाता है। इसका मतलब है कि जन्‍म नलिका पर शिशु से दबाव पड़ना शुरू हो गया है। इस समय आपको गर्भाशय में ऊपर से लेकर बीच में हल्‍की संकुचन महसूस होगी।

नार्मल डिलीवरी के लक्षण। normal delivery ke lakshan.

normal delivery symptoms :- दोस्तों, यदि आप नार्मल डिलीवरी के लक्षण(normal delivery ke lakshan) के बारे में जानना चाहते हैं। तो आप आसानी से जान सकते हैं कि normal delivery symptoms क्या होते हैं के बारे में जानकारी संपूर्ण जानकारी तो चलिए जानते हैं ,नार्मल डिलीवरी के लक्षण के बारे में।

गर्भवती महिला को अगर कुछ खास लक्षण दिखाई देते हैं तो वह नार्मल डिलीवरी के लक्षण (normal delivery ke lakshan) हो सकते हैं। नार्मल डिलीवरी के कुछ ऐसे संकेत (normal delivery symptoms ) जो गर्भवती महिला को अपने 9 वे महीने के अंत में या 2 हप्ता पहले दिखाई देते हैं। जिनसे अंदाजा लग सकता हैं , की उनकी डिलीवरी नार्मल होगी। हर महिला में प्रेग्‍नेंसी के लक्षण और समस्‍याएं भी अलग होती हैं। इस‍लिए नार्मल डिलीवरी के लक्षण और संकेत भी अलग अलग हो सकते हैं।

तो आइये जानते हैं, नॉर्मल डिलीवरी के लक्षण  ( Normal Delivery ke lakshan )

1) बच्चे का नीचे खिसकना।

प्रेगनेंसी के 34 से 36 वें सप्ताह में बच्चे का सिर निचे की तरफ आने लगे तो नार्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती हैं। गर्भ में शिशु के खिसकने और सिर के नीचे आने से पीठ के निचले हिस्से में दबाब पड़ने लगता है। इसका यह मतलब है कि शिशु अब निचले हिस्से में पहुँच गया हैं। और यह समान्य प्रसव की तरफ इशारा करता है। स्त्री शिशु के नीचे आने पर सही से चलने फिरने में भी असमर्थ हो जाती है और ऐसा महसूस होता हैं।
जैसे बच्चा योनि के द्वार के पास पहुँच गया है, यह सामान्य प्रसव के लक्षण हैं। जिससे कि भ्रूण के नीचे की और आने से महिला को उठने- बेठने में भी परेशानी होने लगती हैं। नार्मल डिलीवरी होने से पहले महिला को हल्का सा दर्द होने लगता हैं जिसे यह अंदाजा लग सकता है की डिलीवरी नार्मल ही होगी।

2) पीठ दर्द।

पीठ के निचले हिस्से और जोड़ो की मांसपेशियों में खिचाव आने से दर्द होना ।

3) पानी निकलना ।

जब योनि से पानी के समान तरल निकलने लगे चाहे वो कम मात्रा में हो या अधिक मात्रा में यह भी इस बात का संकेत है कि यह सामान्य प्रसव है। इस दौरान गुलाबी या खून के रंग का तरल बाहर निकल निकलता हैं

4)  पतला मल आना।

जब नार्मल डेलिवरी होने वाली होती है तो गुदा मार्ग की मासपेशिया लचकीली बन जाती है और पतला मल आना शुरू हो जाता हैं।

5) स्तनों में सूजन ।

स्तनों में सूजन भी सामान्य प्रसव का ही लक्षण हो सकता हैं।
 

6) मरोड़ ।

गर्भावस्था के अंतिम दिनों में पेट में होने वाला दर्द या मरोड़ भी इसी बात का प्रतीक हैं कि प्रसव सामान्य ही होगा।

7) ग्रीवा में परिवर्तन।
गर्भाशय के मुख को ग्रीवा कहा जाता है। जैसे-जैसे प्रसव का समय निकट आता हैं। तो ग्रीवा फैल जाती है। इससे इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह प्रसव सामान्य है या नहीं। हालाँकि यह केवल अनुमान है और आपका प्रसव सामान्य है या नहीं इसके बारे में आप डॉक्टर की
सलाह अवश्य लें।


 
नॉर्मल डिलीवरी। delivery kaisi hoti hai.

normal delivery in hindi :- दोस्तों, अब हम आपको यह बताएंगे कि डिलीवरी कैसी होती हैं (delivery kaisi hoti hai)। अर्थात (normal delivery in hindi) के बारे में यदि आप जानना चाहते हैं। तो आप हमारे द्वारा लिखे इस लेख को पूरा लास्ट तक जरूर पढ़े।

normal delivery hindi : आजकल महिलाओं को लगता है कि सिजेरियन ऑपरेशन से डिलीवरी करवाना ज्‍यादा आसान हैं। क्‍योंकि इसमें नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में दर्द कम होता हैं। लेकिन आपको बता दें कि नॉर्मल डिलीवरी शरीर के लिए ज्‍यादा सही होती है और इसके बाद रिकवर करने में भी कम समय लगता है।

हर महिला मां बनने पर अक्‍सर महिलाएं इस असमंजस में रहती हैं कि नॉर्मल डिलीवरी या सिजेरियन ऑपरेशन में से उनके लिए क्‍या कौन सा बेहतर विकल्प रहेगा । यदि आप भी सवाल का जवाब पूछ रहे हैं तो आप जान सकते हैं कि उनकी डिलीवरी कैसे होगी। अगर आप प्रेगनेंट हैं और जानना चाहती हैं कि आपकी नॉर्मल डिलीवरी होगी या सिजेरियन, तो प्रेग्‍नेंसी में मिलने वाले कुछ संकेतों से आप इस सवाल का जवाब पा सकती हैं।

  • नॉर्मल डिलीवरी क्‍या होती है?

वजाइना से शिशु को जन्‍म दिया जाता है। इस तरह की डिलीवरी में कोई सर्जरी नहीं होती है। अधिकांश महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी ही होनी चाहिए। क्‍योंकि इसके बाद रिकवर करने में कम समय लगता है। यदि कोई अन्य समस्‍या न हो तो नॉर्मल डिलीवरी ही करवाई जाती है।

डिलीवरी की डेट से कुछ हफ्ते पहले आपको बदलाव नजर आ सकते हैं। हालांकि, हर महिला में प्रेग्‍नेंसी के लक्षण और समस्‍याएं भी अलग होती हैं इस‍लिए डिलीवरी के लक्षण एवं संकेत भी भिन्‍न हो सकते हैं।प्रसव से एक से चार हफ्ते पहले डिलीवरी के ऐसे संकेत मिल सकते हैं। जो कि यह दर्शाते हैं कि नॉर्मल डिलीवरी ही होगी।

1) पीठ के निचले हिस्‍से के जोड़ों और मांसपेशियों में खिंचाव के कारण तेज दर्द।

2) शिशु के सिर से मूत्राशय पर दबाव पड़ता है जिसकी वजह से बार-बार पेशाब आता है।

3) डिलीवरी से पहले प्रसव जैसा दर्द या संकुचन होता है।

4) गर्भाशय ग्रीवा का चौड़ा हो जाना।

5) डिलीवरी के लिए गुदा की मांसपेशियों का रिलैक्‍स होना शुरू होता है जिससे पतला मल आने लगता है।

6) शिशु के पेल्विक हिस्‍से में आ जाने की वजह से उसकी मूवमेंट में कमी आना।

normal delivery kitne week me hoti hai.

दोस्तों, आज हम आपको यह बताएंगे कि नॉर्मल डिलीवरी कितने सप्ताह में होती हैं (normal delivery kitne week me hoti hai) । यदि आप इसके बारे में जानना चाहते हैं, तो आप हमारे द्वारा दी गई जानकारी के माध्यम से आसानी से जान सकते हैं। कि नॉर्मल डिलीवरी कितने सप्ताह में होती हैं।

नॉर्मल डिलीवरी आख़िरी बार हुए माहवारी के दिन से 280 दिन या 40 हफ़्ते जोड़कर बच्चा होने की तारीख़ बताई जाती हैं। इसके बाद अल्ट्रासाउंड करके भ्रूण के आकार के आधार पर तारीख़ बताई जाती हैं।

अगर दोनों ही स्थिति में ‘बच्चा होने की तारीख़’ में एक हफ़्ता या उससे ज़्यादा अंतर होता हैं, तो ऐसे में अल्ट्रासाउंड को सही माना जाता हैं।

गर्भवती मां के लिए सलाह हैं, यदि बच्चा 37 हफ़्ते (259 दिन) से लेकर 42 हफ़्ते (294 दिन) के बीच में होता हैं। इस समय तक बच्चा पूरी तरह परिपक्व हो जाता है।

कैसे पता चलेगा कि बच्चा होने वाला है।

दोस्तों, अब हम आपको यह बताएंगे कि कैसे पता चलेगा कि बच्चा होने वाला है अर्थात delivery kab hogi kaise pata chalega के बारे में। यदि आप जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप हमारे द्वारा दी गई जानकारी के माध्यम से आसानी से जान सकते हैं कि कैसे पता चलेगा कि बच्चा होने वाला हैं।

डिलीवरी की तारीख के कुछ हफ्ते पहले आपको बदलाव नजर आना शुरू हो जाते हैं।
हालांकि, हर महिला में प्रेग्‍नेंसी के लक्षण और समस्‍याएं अलग- अलग होती हैं। इस‍लिए डिलवरी के लक्षण एवं संकेत भी भिन्‍न हो सकते हैं।

1) शिशु के सिर से मूत्राशय पर दबाव पड़ता है जिसकी वजह से बार-बार पेशाब आता है।

2) ब्रैक्‍सटन हिक्‍स कॉन्‍ट्रैक्‍शन इससे डिलीवरी से पहले प्रसव जैसा दर्द या संकुचन होता है।

3) पीठ के निचले हिस्‍से के जोड़ों और मांसपेशियों में खिंचाव के कारण दर्द और ऐंठन ।

4) प्रसव से एक से चार हफ्ते पहले डिलीवरी के मिलने वाले संकेत ।

5) शिशु के पेल्विक हिस्‍से में आ जाने की वजह से उसकी मूवमेंट में कमी आना।

6) डिलीवरी के लिए गुदा की मांसपेशियों का रिलैक्‍स होना शुरू होता है जिससे पतला मल आने लगता है।

7) गर्भाशय ग्रीवा का चौड़ा हो जाना, लेकिन इस बात को डॉक्टर ही नोटिस करते हैं।

delivery kab hogi kaise pata chalega.

  • डिलीवरी से कुछ दिनों या घंटे पहले मिलने वाले संकेत

1) हर बार पेशाब करते समय म्‍यूकस प्‍लग का कुछ हिस्‍सा निकलना, ये गुलाबी और गाढ़ा हो सकता है।

2) संकुचन बार-बार और तेज होना जो समय के साथ बढ़ जाना ।

3) एम्नियोटिक फ्लूइड की थैली फटने के कारण पानी छूटना।

4) वजाइनल डिस्‍चार्ज अधिक और गाढ़ा होना।

5) पीठ के निचले हिस्‍से में ऐंठन और दर्द।

जब भी आपको ये संकेत नजर आएं तो  समझ लेना चाहिए कि delivery का समय नजदीक आ गया है अर्थात बच्चा होने वाला हैं।

प्रसव के संकेत।

दोस्तों, क्या आप प्रसव के संकेत के बारे में जानते हैं। यदि आप नहीं जानते हैं, तो आप आसानी से प्रसव के संकेत के बारे में जान सकते हैं।

महिलाओं के मन में प्रसव (लेबर पेन) को लेकर कई तरह की सवाल होते हैं। खासकर, तौर पर जब वह पहली बार गर्भधारण करती हैं तो महिलाएं प्रसव (लेबर पेन) के समय होने वाले दर्द के बारे में सुनकर बहुत चिंतित हो जाती हैं। कई बार तो लेबर पेन से जुड़ी सही जानकारी न मिलने के कारण गर्भवती महिलाएं गंभीर रूप से मानसिक तनाव का शिकार हो जाती हैं। इस तनाव का मां और बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए इस लेख में हम लेबर पेन अर्थात प्रसव पीड़ा से संबंधित विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान करेंगें।

  • कैसे पता चलेगा कि प्रसव शुरु हो गया है?

हर महिला का प्रसव का अनुभव अलग होता है। संभव है कि आपको प्रसव के शुरु होने का पता तब चले जब आप इससे गुजर चुकी हों। हालांकि, प्रसव शुरु होने से पहले और शुरुआती प्रसव के दौरान होने वाले बदलावों से आप अनुमान लगा सकती हैं कि आपका प्रसव शुरु हो गया है।

प्रसव शुरु होने से पहले (प्री-लेबर) या शुरुआती प्रसव (लेटेंट फेज़) में आप निम्न लक्षण महसूस कर सकती हैं।

पानी की थैली फटना एमनियोटिक द्रव के तेजी से बहने या रिसाव होने के साथ आपकी झिल्लियां फट सकती हैं। हालांकि, ऐसा प्रसव शुरु होने से काफी पहले हो सकता है, मगर आपको फिर भी अपनी डॉक्टर को इस बारे में बताना चाहिए।

दर्दभरे संकुचन या कसाव महसूस होना जिनकी प्रबलता और बारंबारता अनियमित हो और जो शुरु और बंद हो रहे हों।

पीठ में नीचे की तरफ या पेट में लगातार दर्द और महावारी जैसी ऐंठन महसूस होना।

चिपिचिपा, जैली जैसा गाढ़ा द्रव निकलना, जिसमें खून भी दिखाई दे सकता है। यह वह म्यूकस प्लग होता है, जो गर्भावस्था के दौरान ग्रीवा को बंद रखता है। यदि यह प्लग बाहर आ जाए, तो प्रसव जल्दी ही या फिर कुछ दिनों में शुरु हो सकता है। यह इस बात का संकेत हैं।

पेट में गड़बड़ होना ।

प्रसव शुरु होने से पहले पेट में गड़बड़ होना भी प्रसव के शुरुआती संकेतों में से एक हैं।

डिलीवरी टाइम पास आने के लक्षण।

दोस्तों, आज हम आपको डिलीवरी टाइम पास आने के लक्षण के बारे में बताइए । यदि आप इसके बारे में जानना चाहते हैं तो आप नीचे दी गई जानकारी के माध्यम से आसानी से जान सकते हैं,कि डिलीवरी टाइम पास आने के लक्षण के बारे में

जब डिलीवरी का समय बिल्कुल पास आ जाता हैं तो निम्‍न संकेत मिलने लगते हैं ।

1) वजाइनल डिस्‍चार्ज अधिक और गाढ़ा होना

2) पेट में दर्द महसूस होना।

3) संकुचन का बढ़ जाना।

4) संकुचन की वजह से तेज दर्द होना जो कि 40 से 60 सेकंड तक रहे।

5) पीठ में तेज दर्द होना।

6) योनि से खून आना।

7) महावारी जैसी ऐंठन महसूस होना।

कुछ महिलाएं सिजेरियन लेबर में चली जाती हैं, जबकि कुछ महिलाओं को नॉर्मल डिलिव्हरी से जुड़ी इस असुविधा से गुजरना पड़ता ।

delivery se pehle ke lakshan.

क्या आप जानते हैं? कि delivery se pehle ke lakshan क्या होते हैं। जो कि गर्भवती महिलाओं के शरीर में देखने को मिलते हैं। यदि आप नहीं जानते हैं तो आप नीचे दी गई जानकारी के माध्यम से आसानी से जान सकते हैं, कि delivery se pehle ke lakshan के बारे में ।

delivery se pehle ke lakshan :-

1) पीठ के निचले हिस्‍से में ऐंठन और दर्द।

2) एम्नियोटिक फ्लूइड की थैली फटने के कारण पानी निकलना।

3) वजाइनल डिस्‍चार्ज अधिक और गाढ़ा होना।

4) हर बार पेशाब करते समय म्‍यूकस प्‍लग का कुछ हिस्‍सा निकलना, इसका रंग गुलाबी और गाढ़ा चिपचिपा हो सकता हैं।

5) संकुचन बार-बार और तेज होना जो समय के साथ बढ़ जाना।

यह आर्टिकल आपकी हेल्थ से संबंधित किसी भी प्रकार का दावा नहीं करता हैं। ऐसे में हमारा आपसे यही निवेदन हैं, कि आपको किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर किसी महिला डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

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