पुत्र प्राप्ति के लिए किस करवट सोना चाहिए। लड़का पैदा करने की विधि बताएं। Putra Prapti ke liye kis karvat Sona chahie.

पुत्र प्राप्ति के लिए किस करवट सोना चाहिए।

नमस्कार, दोस्तों आज हम आपको पुत्र प्राप्ति के लिए किस करवट सोना चाहिए, इसके बारे में बताएंगे। यदि आप इसके बारे में जानना चाहते हैं, तो आप हमारे द्वारा लिखे इस लेख के माध्यम से आसानी से जान सकते हैं ,कि पुत्र प्राप्ति के लिए किस करवट सोना चाहिए। तो चलिए जानते हैं, इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी।

आधुनिक समय से ही पुत्र प्राप्ति की परंपरा संसार में चली आ रही हैं। भारतीय हिंदू धर्म में हर दंपति को पुत्र की चाहत होती हैं। पुत्र बुढ़ापे के समय परिवार का सहारा बनता है, तथा कुल को आगे बढ़ाता हैं।

इसलिए हर कोई कुल को आगे बढ़ाने के लिए और बुढ़ापे में अपने सहारे के लिए हर दंपति पुत्र की कामना करता हैं। लेकिन पुत्र व पुत्री होना प्राकृतिक हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे तरीके के बारे में बताएंगे। कि पुत्र प्राप्ति के लिए किस करवट सोना चाहिए।अर्थात कौनसे करवट सोने से पुत्र प्राप्ति होती है।

पुत्र प्राप्ति के दंपति के लिए एक अलग नियम दिया हैं। इस नियम के अनुसार स्त्री को बेड पर अपने पति के लेफ्ट साइड सोना हैं।

थोड़ी देर बाद बाई करवट सोने से दायां स्वर चालू होता है। तथा दाई करवट सोने से बायां स्वर चालू होता हैं। ऐसे में दाई और सोने से पुरुष का दायां स्वर चलने लगेगा तथा बाई और सोने से स्त्री का बायां स्वर चलने लगेगा। जब ऐसा हो तब दंपति को शारीरिक संबंध बनाना चाहिए। इससे पुत्र प्राप्ति के लिए गर्भधारण हो जाता हैं।

लेकिन पुत्र प्राप्ति के लिए मेरा आपसे ही सुझाव हैं, कि पुत्र व पुत्री होना एक प्राकृतिक क्रिया हैं। इंसान का इसमें कोई वश नही चलता हैं, फिर भी अगर आप चाहे तो यह कोशिश कर सकते हैं।

पुत्र प्राप्ति के लिए कौन सा स्वर चलना चाहिए।

दोस्तों, आज हम आपको पुत्र प्राप्ति के लिए कौन सा स्वर चलना चाहिए, इसके बारे में बताएंगे। यदि आप इसके बारे में जानना चाहते हैं, तो आप हमारे द्वारा दी गई जानकारी के माध्यम से आसानी से जान सकते हैं। कि पुत्र प्राप्ति के लिए कौन सा स्वर चलना चाहिए तो चलिए जानते हैं ,इसके बारे में संपूर्ण जानकारी।

शास्त्रानुसार मासिक स्राव के बाद की सोलह रातों में ही गर्भाधान संभव है। इनमें सात रातों को सम एवं छः रातों को विषम रात्रि कहते हैं। इनमें प्रथम तीन रातें त्याज्य हैं। अतः चैथी, छठी, आठवीं, दसवीं, बारहवीं, चैदहवीं और सोलहवीं सम है। यदि इन सब रातों में पति-पत्नी सहवास करें तो गर्भधारण होने पर पुत्र की प्राप्ति होती है और विषम पांचवी, सातवीं, नौवीं, ग्यारहवीं, तेरहवीं और पंद्रहवीं रात्रि में सहवास से कन्या उत्पन्न होती है। स्वर साधना से मनचाही संतान प्राप्त कर सकते हैं। हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों ने मनुष्य मात्र के कल्याण के लिए जिन ग्रंथों की रचना की उनमें ‘स्वरोदय-विज्ञान’ भी एक है। स्वर ज्ञान भी योग ही है। इस ज्ञान पर विज्ञान की शोध की जरूरत है। स्वर विज्ञान द्वारा हम अपनी बहुत सी जटिल समस्याओं का समाधान भी आसानी से कर सकते हैं,

जब पुरूष का सूर्य स्वर (दॉहिना स्वर) चल रहा हो तथा स्त्री का चन्द्र स्वर (बॉया स्वर) चल रहा हो तो विषय भोग करने से जो गर्भ ठहरेगा उससे पुत्र की प्राप्ति होगी। किन्तु जब पुरूष का चन्द्र स्वर (बायॉ स्वर) चल रहा हो और स्त्री का सूर्य स्वर (दॉहिना स्वर) चल रहा हो तो विषय सम्भोग करने से पुत्री की प्राप्ति होती है।

पंचतत्व के अनुसार – पृथ्वी तत्व में पुत्र, जल तत्व में पुत्री, वायु तत्व में गर्भ ‘गल’ जाएगा, अग्नि तत्व में गर्भ गिर जाएगा तथा आकाश तत्व में नपुंसक’ का जन्म होता है।

ऐसा माना जाता हैं, कि स्त्री को मासिक स्राव के बाद स्नान करने के पश्चात चौथे दिन से सोलहवें दिन तक भोग करने से गर्भ की प्राप्ति होती है। स्वर साधना से मनचाही संतान प्राप्त कर सकते हैं। स्वर द्वारा संतान प्राप्ति स्वर साधना संतान प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ बतलाई गई है। स्वरोदय ज्ञान के माध्यम से पति-पत्नी मनचाही संतान प्राप्त कर सकते हैं।

  1. चौथी रात्रि को विषय भोग करने से अल्पायु तथा दरिद्र पुत्र की प्राप्ति होती है।
  2. पॉचवी रात्रि में विषय भोग करने से सुखदायक पुत्री की प्राप्ति होती है।
  3. छठी रात्रि में विषय भोग करने से मध्यम आयु वाला पुत्र प्राप्त होता है।
  4. सातवीं रात्रि में विषय भोग करने से बॉझ पुत्री की प्राप्ति होती है।
  5. आठवीं रात्रि में विषय भोग करने से ऐश्वर्यवान पुत्र होता है।
  6. नवीं रात्रि में विषय भोग करने से ऐवर्यवती पुत्री होती है।
  7. दसवीं रात्रि में विषय भोग करने से चालाक पुत्र होता है।
  8. ग्यारहवीं रात्रि में विषय भोग करने से दुश्चरित्र पुत्री की प्राप्ति होती है।
  9. बारहवीं रात्रि में विषय भोग करने से सर्वोत्तम पुत्र होता है।
  10. तेरहवीं रात्रि में विषय भोग करने से अशुभ संतान या वर्णसंकर कोखवाली पुत्री होती है।
  11. चौदहवीं रात्रि में विषय भोग करने से सर्वगुण सम्पन्न पुत्र प्राप्त होता है।
  12. पन्द्रहवीं रात्रि में विषय भोग करने से भाग्यशाली पुत्री होती है।
  13. सोलहवीं रात्रि में विषय भोग करने से सभी प्रकार से उत्तम पुत्र की प्राप्ति होती है।

पुत्र प्राप्ति के लिए डेट कैसे निकाले।

दोस्तों, क्या आप जानते हैं ? कि पुत्र प्राप्ति के लिए डेट कैसे निकालें। यदि आप नहीं जानते हैं ,तो आज हम आपको बताएंगे कि पुत्र प्राप्ति के लिए डेट कैसे निकाले।

गर्भाधान के संबंध में आयुर्वेद में लिखा है कि गर्भाधान ऋतुकाल (मासिक धर्म) की आठवीं, दसवीं और बारहवीं रात्रि को ही किया जाना चाहिए। जिस दिन मासिक ऋतु स्राव शुरू हो, उस दिन तथा रात को प्रथम दिन मानकर गिनती करना चाहिए। छठी, आठवीं आदि सम रात्रियां पुत्र उत्पत्ति के लिए और सातवीं, नौवीं आदि विषम रात्रियां पुत्री की उत्पत्ति के लिए होती हैं अतः जैसी संतान की इच्छा हो, उसी रात्रि को गर्भाधान करना चाहिए।

पुत्र प्राप्ति के लिए डेट कैसे निकाले इसके लिए इस बात का ध्यान रखें कि इन रात्रियों के समय शुक्ल पक्ष यानी चांदनी रात (पूर्णिमा) वाला पखवाड़ा भी हो, यह अनिवार्य है, यानी कृष्ण पक्ष की रातें हों तो गर्भाधान की इच्छा से सहवास न करें।

पूरे मास में इस विधि से किए गए सहवास के अलावा पुनः सहवास नहीं करना चाहिए। ऋतु दर्शन के दिन से 16 रात्रियों में शुरू की चार रात्रियां, ग्यारहवीं व तेरहवीं और अमावस्या की रात्रि गर्भाधान के लिए वर्जित कहीं गई है। सिर्फ सम संख्या यानी छठी, आठवीं, दसवीं, बारहवीं और चौदहवीं रात्रि को ही गर्भाधान संस्कार करना चाहिए।

शुक्ल पक्ष में जैसे-जैसे तिथियां बढ़ती हैं, वैसे-वैसे चन्द्रमा की कलाएं बढ़ती हैं। इसी प्रकार ऋतुकाल की रात्रियों का क्रम जैसे-जैसे बढ़ता है, वैसे-वैसे पुत्र उत्पन्न होने की संभावना बढ़ती है, यानी छठवीं रात की अपेक्षा आठवीं, आठवीं की अपेक्षा दसवीं, दसवीं की अपेक्षा बारहवीं रात अधिक उपयुक्त होती है।

इनको भी पढ़े :-

पुत्र प्राप्ति के लिए नारियल का बीज कब खाना चाहिए।

दोस्तों, आज हम आपको पुत्र प्राप्ति के लिए नारियल का बीज कब खाना चाहिए। इसके बारे में बताएंगे, आप इसके बारे में जानना चाहते हैं। तो आप नीचे दी गई जानकारी को पूरा लास्ट तक जरूर पढ़ें।

अधिकांश लोग लड़की से ज्यादा लड़के की ख्वाहिश रखते हैं। लेकिन आजकल लड़का और लड़की दोनों एक समान हैं। लड़कियां भी किसी मामले में लड़कों से पीछे नहीं है परंतु इसके बावजूद भी कई लोग पुत्र प्राप्ति की इच्छा के लिए तरह-तरह के उपाय अपनाते हैं।

पुत्र प्राप्ति को लेकर कुछ ऐसी मान्यताएं हैं, जिसमें से एक नारियल के बीज की भी मान्यता है। ऐसा माना जाता हैं, कि जिसे संतान सुख की प्राप्ति नहीं हो रही है या जो पुत्र प्राप्ति करना चाहता है। वह नारियल के बीज का प्रयोग कर पूर्ण विधि से संतान सुख की प्राप्ति कर सकता है।

आपको बता दें कि नारियल को श्रीफल के नाम से भी जानते हैं। नारियल का इस्तेमाल पूजा-पाठ और धार्मिक कामों में किया जाता है। नारियल को बहुत पवित्र माना जाता है। कुछ नारियल में अंदर से बीज निकलते हैं, जिसको भगवान शिव जी का आशीर्वाद माना जाता है।

अगर किसी को पुत्र प्राप्ति की इच्छा है तो नारियल के बीज से सोमवार के दिन एक उपाय करें। सोमवार के दिन प्रातः काल जल्दी उठे। इसके पश्चात स्नान आदि से निवृत्त होने के पश्चात साफ-सुथरे कपड़े धारण कर लीजिए। उसके बाद “ओम नमः शिवाय” मंत्र की एक माला का जाप करें।

इसके बाद भगवान शिव जी से अपने मन की बात कहें। इसके बाद नारियल को शिवलिंग के पास अर्पित करना होगा। इसके बाद भगवान शिव के सामने देसी घी का एक दीपक जलाएं और ओम नमः शिवाय मंत्र से भगवान शिव जी की संपूर्ण श्रद्धा भाव से पूजा- अर्चना करें ।

इसके पश्चात नारियल बीज को भगवान शिव के पास रखें। अगर नारियल के अंदर बीज नहीं है तो ऐसी स्थिति में आप सिर्फ नारियल को भी शिवलिंग के पास रख सकते हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार, नारियल और नारियल के बीज को शिवलिंग पर अर्पित करने के महत्व के बारे में बताया गया है। उसके बाद आप शाम के समय नारियल या इसके बीज को गंगाजल के पात्र में डाल दीजिए।

अब आपको अगले दिन यानी कि मंगलवार के दिन नारियल के इस बीज को हनुमान जी का ध्यान करते हुए निहार मुंह गाय के दूध के साथ खा लीजिए। परंतु इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आपको नारियल का बीज सीधा और साबुत ही निगलना होगा। आप नारियल के बीज को ना चबाएं। सोमवार के दिन सुबह इस उपाय को किया जा सकता है।

मोर पंख से पुत्र प्राप्ति की दवा बताएं ।

दोस्तों, आज हम आपको मोर पंख से पुत्र प्राप्ति की दवा बताएंगें। यदि आप इसके बारे में जानना चाहते हैं ,तो आप हमारे द्वारा दी गई जानकारी के माध्यम से आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

शास्त्रों में भगवान श्री कृष्ण को मोर पंख अति प्रिय हैं। वह अपने मुकुट पर मोर पंख नारायण करता हैं। भगवान कृष्ण के अलावा इंद्र देव भगवान को भी मोर पंख अति प्रिय हैं। वह मोर पंख पर बैठना पसंद करते हैं। प्राचीन समय में मोर पंख का उपयोग औषधि में किया जाता था। प्राचीन समय में मोर पंख की कलम बनाकर बड़े बड़े ग्रंथ लिखे गए हैं।

जैसे की आपको प्रेगनेंसी होने के 40 दिन में ही इस उपाय की शुरुआत करनी होगी। क्योंकि आपको 25 से 30 दिन के बाद ही पता चलता है, की आपकी प्रेगनेंसी कंफर्म हैं। उसके बाद 15 से 20 दिन के अंदर आपको यह उपाय करना होगा।

सबसे पहले किसी भी अच्छे दिन या शुभ दिन तथा अवसर पर मोर पंख अपने घर पर लेकर आए। और अगर कोई अच्छा दिन जैसे की होली, दिवाली या अन्य त्योहार हो या फिर आप इस मोर पंख को अपने घर किसी अन्य शुभ दिन भी ला सकते हैं और मोर पंख लाने के बाद इसे अपने पूजा स्थान पर रखें।

पुत्र प्राप्ति हेतु दवा बनाने की विधि।

सबसे पहले आप तीन मोर पंख लें। अब मोर पंख के बिच में जो चाँद जैसा भाग होता है। उसे कैंची से काट कर निकाल लें। अब इन तीनो हिस्सों को अच्छे से पीस ले और उसमे गुड मिलाकर तीन गोलियां एक समान बना लें।

 कैसे खाए:-

आपको सुबह ब्रह्म मुहूरत में उठ कर दैनिक कार्यो से निवृत होकर भगवान विष्णु तथा श्री कृष्ण से पुत्र प्राप्ति के लिए प्रार्थना करनी हैं। अब सूरज निकलने से पहले तीन दिन लगातार यह गोलियां गाय के दूध के साथ लेनी हैं।

 सावधानियां :- 

यह गोलियां लेने के चार घंटे बाद तक आपको कुछ नही लेना हैं। अगर आपको प्यास लगती है तो पानी पी सकते है। लेकिन वह भी दो घंटे के बाद पीना हैं।

इसके अलावा आप जिस गाय के दूध के साथ औषधि ले रहे हैं। वह गाय एक बछड़े की माँ होनी चाहिए तथा उसका बछड़ा जीवित होना चाहिए। आप तीन दिन तक इसी गाय के दूध का सेवन करेंगे।

इसमें जो गुड मिलाते है वह सिर्फ आपको गोली लेने में आसानी रहे है, इसलिए मिलाया जाता हैं। गुड मिलाने से औषधि के गुण में कोई परिवर्तन नही आएगा।

वैसे तो इसका कोई वैज्ञानिक प्रूफ मौजूद नहीं हैं। लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह सभी उपाय कार्य भी कर सकते हैं। तो ऐसे में आपको यदि यह उपाय सही लगे तो ही आप इस उपाय का इस्तेमाल करें वरना इसका इस्तेमाल न करें।

पुत्र प्राप्ति के लिए शुक्ल पक्ष में डेट कैसे निकाले।

दोस्तों, आज हम आपको पुत्र प्राप्ति के लिए शुक्ल पक्ष में डेट कैसे निकाले इसके बारे में बताएंगे यदि आप इसके बारे में जानना चाहते हैं, तो आप हमारे द्वारा दी जाने वाली जानकारी को पूरा लास्ट तक जरूर पढ़ें।

गर्भाधान ऋतुकाल (मासिक धर्म) की आठवीं, दसवीं और बारहवीं रात्रि को ही किया जाना चाहिए। जिस दिन मासिक ऋतु स्राव शुरू हो, उस दिन तथा रात को प्रथम दिन मानकर गिनती करना चाहिए। छठी, आठवीं आदि सम रात्रियां पुत्र उत्पत्ति के लिए और सातवीं, नौवीं आदि विषम रात्रियां पुत्री की उत्पत्ति के लिए होती हैं अतः जैसी संतान की इच्छा हो, उसी रात्रि को गर्भाधान करना चाहिए।

पुत्र प्राप्ति के लिए डेट कैसे निकाले इसके लिए इस बात का ध्यान रखें कि इन रात्रियों के समय शुक्ल पक्ष यानी चांदनी रात (पूर्णिमा) वाला पखवाड़ा भी हो, यह अनिवार्य है, यानी कृष्ण पक्ष की रातें हों तो गर्भाधान की इच्छा से सहवास न करें।

पूरे मास में इस विधि से किए गए सहवास के अलावा पुनः सहवास नहीं करना चाहिए। ऋतु दर्शन के दिन से 16 रात्रियों में शुरू की चार रात्रियां, ग्यारहवीं व तेरहवीं और अमावस्या की रात्रि गर्भाधान के लिए वर्जित कहीं गई है। सिर्फ सम संख्या यानी छठी, आठवीं, दसवीं, बारहवीं और चौदहवीं रात्रि को ही गर्भाधान संस्कार करना चाहिए।

शुक्ल पक्ष में जैसे-जैसे तिथियां बढ़ती हैं, वैसे-वैसे चन्द्रमा की कलाएं बढ़ती हैं। इसी प्रकार ऋतुकाल की रात्रियों का क्रम जैसे-जैसे बढ़ता है, वैसे-वैसे पुत्र उत्पन्न होने की संभावना बढ़ती है, यानी छठवीं रात की अपेक्षा आठवीं, आठवीं की अपेक्षा दसवीं, दसवीं की अपेक्षा बारहवीं रात अधिक उपयुक्त होती है।

लड़का पैदा करने की विधि बताएं।

दोस्तों, आज हम आपको लड़का पैदा करने की विधि बताएंगें। यदि आप इसके बारे में जानना चाहते हैं तो आप आसानी से जान सकते हैं कि लड़का पैदा करने की विधि के बारे में ।

आधुनिक युग में आज भी कई ऐसे लोग मौजूद हैं। जो पुत्री से ज्यादा पुत्र की ही चाहत रखते है। महिलाओं के गर्भधारण करने पर परिवार में एक अलग हर्ष देखने को मिलता है। लेकिन आज भी समाज में अधिकतर लोग चाहते हैं, कि महिला पुत्र को ही जन्म दें।

लोगों में इस तरह की विचारधारा कई कारणों की वजह से है। लोगों को ऐसा लगता है कि लड़का वंश को आगे बढ़ाता है और बुढ़ापे का सहारा बनता है। लोगों की इसी सोच के चलते कई महिला को पुत्र प्राप्ति के कई उपाय बताए जाते हैं, ताकि वह उनका पालन कर पुत्र को जन्म दे सके। ऐसा कोई भी उपाय बस एक झूठ है चाहे वो लड़का पैदा करने का घरेलू उपाय हो, या कोई दवा करे कि उनका बताया लड़का पैदा करने का तरीका चिकित्सीय विज्ञान पर आधारित है। लेकिन अब तक इनमें से कोई भी तरीका सिफल नहीं हुआ है।  इस के अलावा कोई दम्पति ऐसा कुछ भी नहीं कर सकता जिससे होने वाले बच्चे का लिंग पता किया जा सकें। कि होने वाला बच्चा लड़का हैं या लड़की ।

विज्ञान के मुताबिक लड़के या लड़की का जन्म एक्स (X) और वाई (Y) क्रोमोसोम पर निर्भर करता है। क्रोमोसोम एक का डीएनए अणु होता है। महिलाओं में (X) क्रोमोसोम होते हैं, जबकि पुरूषों के अंदर (X) और (Y) दोनों ही तरह के क्रोमोसोम होते हैं। पुरुष और महिला के संभोग के बाद जब वीर्य महिला के अंदर जाता है तब यदि महिलाओं के (X) क्रोमोसोम से पुरुष का (X) क्रोमोसोम मिलता है तो इस मिलन से लड़की का जन्म होता है। इसी तरह महिला के (X ) क्रोमोसोम से जब पुरूष के (Y) क्रोमोसोम मिलते हैं तो इससे लड़के का जन्म होता है।

लेकिन इसके अलावा लोगों का मानना हैं, कि यदि शुक्ल पक्ष (चन्द्र मास का पहला चरण) की 6वीं, 8वीं, 12वीं, 14वीं, और 16वीं रात सेक्स किया जाए तो भी पुत्र होता है।

पुत्र प्राप्ति के लिए पुरुष को क्या खाना चाहिए।

दोस्तों, आज हम आपको पुत्र प्राप्ति के लिए पुरुष को क्या खाना चाहिए। इसके बारे में बताएेगें। यदि आप इस के बारे में जानना चाहते हैं, तो आप हमारे द्वारा दी गई जानकारी को पूरा अवश्य पढ़ें।

पुत्र प्राप्ति के लिए पुरुष को दूध और दूध से बने चीजों अर्थात भोज्य पदार्थ का सेवन करना चाहिए। इन्हें अधिक से अधिक मात्रा में अपने आहार में शामिल करें। इसके अलावा योगा पर भी विशेष ध्यान दें, ताकि उनका शरीर स्वस्थ बनें। अधिक पौष्टिक चीजें जैसे कि दूध, दही, छाछ, दाल, इत्यादि प्रोटीन वाली चीजों का अधिक सेवन करें ।

पुत्र प्राप्ति के नियम।

दोस्तों, आज हम आपको पुत्र प्राप्ति के नियम के बारे में विस्तार पूर्वक बताएंगे। यदि आप इसके बारे में जानना चाहते हैं, तो आप हमारे द्वारा दी गई जानकारी को पूरा लास्ट तक अवश्य पढ़ें।

जिस व्यक्ति की जन्मकुंडली में संतान योग जैसा विद्यमान होता हैं । उस अनुसार दंपत्ति को संतान की प्राप्ति हो ही जाता हैं । फ़िर भी कुछ प्रयासों से मनचाही संतान प्राप्त की जा सकती हैं। यानि कर्म करने से बहुत कुछ प्राप्त किया जा सकता है, कुछ लोग पुत्र-पुत्री में भेद नहीं करते, ऐसी विचारधारा बहुत कम लोगों में देखने को मिलती है। लेकिन यदि आप पुत्र चाहते हैं या फिर आप पुत्री चाहते हैं, तो आप कुछ तरीके अपनाकर यानि ध्यान देकर उसी तरीके से सम्भोग करें । तो ऐसा करने से आप कुछ हद तक अपनी मनचाही संतान प्राप्त कर सकते हैं।

पुत्र प्राप्ति हेतु मासिक धर्म के चौथे दिन सहवास की रात्रि को एक प्याला भरकर चावल का धोवन यानी मांड में एक नींबू का रस निचोड़कर पी जावें। अगर इच्छुक महिला रजोधर्म से मुक्ति पाकर लगातार तीन दिन चावल का धोवन यानी मांड में एक नीबू निचोड़कर पीने के बाद खुशी से पति के साथ सहवास करें तो उसको पुत्र की कामना के लिए भगवान को भी वरदान देना पड़ेगा। गर्भ न ठहरने तक प्रतिमाह यह प्रयोग तीन दिन तक करें, गर्भ ठहरने के बाद न करें।

गर्भाधान के संबंध में आयुर्वेद में लिखा है कि गर्भाधान ऋतुकाल (मासिक धर्म) की आठवीं, दसवीं और बारहवीं रात्रि को ही किया जाना चाहिए। जिस दिन मासिक ऋतु स्राव शुरू हो, उस दिन तथा रात को प्रथम दिन मानकर गिनती करना चाहिए। छठी, आठवीं आदि सम रात्रियां पुत्र उत्पत्ति के लिए और सातवीं, नौवीं आदि विषम रात्रियां पुत्री की उत्पत्ति के लिए होती हैं अतः जैसी संतान की इच्छा हो, उसी रात्रि को गर्भाधान करना चाहिए।

इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखें कि इन रात्रियों के समय शुक्ल पक्ष यानी चांदनी रात (पूर्णिमा) वाला पखवाड़ा हो यह अनिवार्य है, यानी कृष्ण पक्ष की रातें हों तो गर्भाधान की इच्छा से सहवास न कर परिवार नियोजन के साधन अपनाना चाहिए।

शुक्ल पक्ष में जैसे-जैसे तिथियां बढ़ती हैं, वैसे-वैसे चन्द्रमा की कलाएं बढ़ती हैं। इसी प्रकार ऋतुकाल की रात्रियों का क्रम जैसे-जैसे बढ़ता है, वैसे-वैसे पुत्र पैंदा होने की संभावना बढ़ती है, यानी छठवीं रात की अपेक्षा आठवीं, आठवीं की अपेक्षा दसवीं, दसवीं की अपेक्षा बारहवीं रात अधिक उपयुक्त मानी जाती हैं।

पूरे एक मास में इस विधि से किए गए सहवास के अलावा पुनः सहवास नहीं करना चाहिए, वरना घपला भी हो सकता है। ऋतु दर्शन के दिन से 16 रात्रियों में शुरू की चार रात्रियां, ग्यारहवीं व तेरहवीं और अमावस्या की रात्रि गर्भाधान के लिए वर्जित कही गई है। सिर्फ सम संख्या यानी छठी, आठवीं, दसवीं, बारहवीं और चौदहवीं रात्रि को ही गर्भाधान करना चाहिए।

गर्भाधान वाले दिन व रात्रि में आचार-विचार अच्छे रखते हुए मन में हर्ष व उत्साह रखना चाहिए। गर्भाधान के दिन से ही चावल की खीर, दूध, भात, शतावरी का चूर्ण दूध के साथ रात को सोते समय, प्रातः मक्खन-मिश्री, जरा सी पिसी काली मिर्च मिलाकर ऊपर से कच्चा नारियल व सौंफ खाते रहना चाहिए, यह पूरे नौ माह तक करना चाहिए, इससे होने वाली संतान स्वस्थ, सुडौल होती है।

गोराचन 30 ग्राम, गंजपीपल 10 ग्राम, असगंध 10 ग्राम, तीनों को बारीक पीसें, चौथे दिन स्नान के बाद पांच दिनों तक प्रयोग में लाएं, गर्भधारण के साथ ही पुत्र अवश्य पैदा होगा।

पुत्र प्राप्ति हेतु गर्भाधान का नियम ।

पुराने आयुर्वेद ग्रंथों में पुत्र-पुत्री प्राप्ति हेतु दिन-रात, शुक्ल पक्ष, कृष्ण पक्ष तथा माहवारी के दिन से सोलहवें दिन तक का महत्व बताया गया है। धर्म ग्रंथों में भी इसके बारे में जानकारी दी गई है।

यदि आप पुत्र प्राप्त करना चाहते हैं और वह भी गुणवान, तो हम आपको कुछ सुविधा के लिए यहाँ माहवारी के बाद के विभिन्न रात्रियों की महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं।

  1. चौथी रात्रि को विषय भोग करने से अल्पायु तथा दरिद्र पुत्र की प्राप्ति होती है।
  2. पॉचवी रात्रि में विषय भोग करने से सुखदायक पुत्री की प्राप्ति होती है।
  3. छठी रात्रि में विषय भोग करने से मध्यम आयु वाला पुत्र प्राप्त होता है।
  4. सातवीं रात्रि में विषय भोग करने से बॉझ पुत्री की प्राप्ति होती है।
  5. आठवीं रात्रि में विषय भोग करने से ऐश्वर्यवान पुत्र होता है।
  6. नवीं रात्रि में विषय भोग करने से ऐवर्यवती पुत्री होती है।
  7. दसवीं रात्रि में विषय भोग करने से चालाक पुत्र होता है।
  8. ग्यारहवीं रात्रि में विषय भोग करने से दुश्चरित्र पुत्री की प्राप्ति होती है।
  9. बारहवीं रात्रि में विषय भोग करने से सर्वोत्तम पुत्र होता है।
  10. तेरहवीं रात्रि में विषय भोग करने से अशुभ संतान या वर्णसंकर कोखवाली पुत्री होती है।
  11. चौदहवीं रात्रि में विषय भोग करने से सर्वगुण सम्पन्न पुत्र प्राप्त होता है।
  12. पन्द्रहवीं रात्रि में विषय भोग करने से भाग्यशाली पुत्री होती है।
  13. सोलहवीं रात्रि में विषय भोग करने से सभी प्रकार से उत्तम पुत्र की प्राप्ति होती है।

यदि आपकी संनात होती हो परन्तु जीवित न रहती हो तो सन्तान होने पर मिठाई के स्थान पर नमकीन बांटें। भगवान शिव का अभिषेक करें तथा सूर्योदय के समय तिल के तेल का दीपक पीपल के पेड़ के पास जलाने से लाभ अवश्य होगा। मां दुर्गा के दरबार में सुहाग सामिग्री चढ़ाये भी लाभ अवश्य मिलेगा।

खाना खाने के बाद किस तरफ लेटना चाहिए।

दोस्तों, आज हम आपको खाना खाने के बाद किस तरफ लेट आना चाहिए, इसके बारे में बताएंगे । यदि आप उसके बारे में जानना चाहते हैं, तो आप हमारे द्वारा दी गई जानकारी को अवश्य पढ़ें।

आजकल की भाग दौड़ भरी जिंदगी के बाद थक हारकर जब हम बिस्तर पर नींद लेते हैं। लेकिन हमें किस करवट सोना है इसका ख्याल नहीं रखते हैं। लेकिन हम किस करवट सो रहे हैं, इसका हमारी सेहत पर सीधा असर पड़ता हैं। कई लोग सीधा सोते हैं तो कुछ दाईं या बाईं ओर करवट लेकर सोते हैं। लेकिन कई बार गलत पोजिशन में लेटने की वजह से हमारी तबियत भी बिगड़ जाती हैं। लेकिन आज जानेंगे कि किस करवट सोने से फायदा होता हैं। 

1) बाईं तरफ करवट लेकर सोना स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता हैं। इससे दिल पर अधिक दबाव नहीं पड़ता, और वह अच्छे तरीके से कार्य कर पाता हैं।

2)खाने खाने के बाद बाईं तरफ सोने से सीने में जलन की समस्या से राहत मिलती हैं।

3) पाचन तंत्र मजबूत होता हैं।

4) बाईं करवट सोने से रीढ़ की हड्डियों को भी लाभ प्राप्त होता हैं।

5)एसिडिटी की समस्या से राहत मिलती हैं ।

6)कब्ज की समस्या दूर होती हैं ।

7) थकान महसूस नहीं होती हैं ।

8) शरीर में ताजगी बनी रहती हैं।

कौन से पक्ष में पुत्र की प्राप्ति होती है।

दोस्तों ,आज हम आपको यह बताएंगे कि कौन से पक्ष में पुत्र की प्राप्ति होती हैं। यदि आप इसके बारे में जानना चाहते हैं,तो आप हमारे द्वारा दी गई जानकारी को अवश्य पढ़े ।

पुत्र प्राप्ति के लिए कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष दोनों ही शुभ फलदायक एवं अच्छे हैं। विशेष रूप से शुक्ल पक्ष पुत्र प्राप्ति हेतु अत्यन्त प्रभावशाली माना जाता है। कृष्ण पक्ष में पुत्र प्राप्ति हेतु विभिन्न प्रकार के उपाय किए जा सकते हैं। इन उपायों में कुछ उपाय आध्यात्मिक भी हैं। साथ ही माहवारी के दिन से सोलहवें दिन तक का महत्व अलग-अलग बताया गया है। धर्म ग्रंथों में भी इसके बारे में जानकारी दी गई है।

प्रेगनेंसी में किस साइड सोना चाहिए। pregnancy me kis side sona chahiye.

दोस्तों, क्या आप जानते हैं कि प्रेगनेंसी में किस साइड सोना चाहिए(pregnancy me kis side sona chahiye)। यदि आप इसके बारे में नहीं जानते हैं तो आज हम आपको इसके बारे में जानकारी प्रदान करेंगे तो चलिए जानते हैं प्रेगनेंसी में किस साइड सोना चाहिए (pregnancy me kis side sona chahiye) इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी।

प्रेग्‍नेंसी की तीन तिमाही होती हैं जिनमें पहले तीन महीने गर्भावस्‍था की पहली तिमाही, बाद के तीन महीने प्रेग्‍नेंसी की दूसरी तिमाही और आखिरी तीन महीने प्रेग्‍नेंसी की तीसरी तिमाही कहलाती हैं।

इस तीन तिमाही में प्रेगनेंट महिलाओं के सोने की पोजीशन अलग-अलग होती हैं। तो चलिए जानते हैं ,गर्भवती महिलाओं को प्रेग्‍नेंसी में किस साइड सोना चाहिए।

1) पहली तिमाही में आप किसी भी पोजीशन में सो सकती हैं। इन तीन महीनों में आप सीधी लेट सकती हैं, करवट ले सकती हैं और पेट के बल भी सो सकती हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि अभी भ्रूण प्‍यूबिक मोड में होता है जिससे गर्भाशय पर सीधा दबाव नहीं पड़ता है। इसलिए पहले तीन महीनों में आप किसी भी पोजीशन में सो सकती हैं।

लेकिन गायनेकोलॉजिस्ट के मुताबिक कुछ स्थितियों में महिलाओं को पेट के बल सोने की सलाह दी जाती है। क्योंकि गर्भाशय का साइज बढ़ने पर मूत्राशय पर प्रेशर पड़ता है, तब प्रेगनेंट महिला को पेशाब करने में दिक्‍कत होती है या पेशाब रूक जाता है। इन स्थितियों में कुछ देर के लिए पेट के बल लेटने की सलाह दी जाती हैं।

2)दूसरी तिमाही में गर्भवती महिलाओं को पेट के बल नहीं सोना चाहिए। गायनेकोलॉजिस्ट के मुताबिक शिशु जिस यूट्रस में होता है, उस यूट्रस का प्रेशर पीछे की एक रक्‍त वाहिका पर पड़ता है जो कि शरीर के निचले हिस्‍से से हार्ट तक खून को पहुंचाती है।

इस रक्‍त वाहिका को आईवीसी कहते हैं। सीधा लेटने पर यूट्रस आईवीसी के ऊपर प्रेशर डालता है। हो सकता है कि इसके कारण सीधा लेटने पर आपको सांस लेने में दिक्‍कत हो या फिर आपको भारीपन महसूस हो। इस वजह से आपको चौथे महीने के बाद से पीठ के बल सोना बंद कर देना चाहिए।

3)आखिरी तिमाही में टांगों को मोड़कर या सीधा रखते हुए करवट लेकर लेटें और टांगों के बीच में तकिया लगाकर रखें। दाईं या बाईं करवट सो सकती हैं, दोनों ही पोजीशन में शिशु को ब्‍लड सप्‍लाई अच्‍छी मिलती है।
आप कमर और छाती के नीचे तकिया लगाकर लेटें। इससे शरीर को आराम मिलेगा और नींद आने में भी आसानी होगी। अगर आपको सांस लेने में दिक्‍कत हो रही है तो आप सिर ऊंचा कर के सो सकती हैं। अगर कोई परेशानी नहीं है कि सिर के नीचे एक से ज्‍यादा तकिए लगाकर सो सकती हैं।

यदि प्रेगनेंट महिला के पैरों में सूजन हो रही है, तो आप पैरों के नीचे तकिया लगाकर सो सकती हैं।

अत: प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए बाईं करवट में सोना ही सबसे बेहतर होता हैं। क्योंकि उससे गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। इसके अलावा एड़ी, हाथों और पैरों में सूजन की समस्या भी नहीं होती हैं।

मोर पंख से लड़का होने के उपाय।

दोस्तों, आज हम आपको मोर पंख से लड़का होने के उपाय के बारे में बताएंगे। यदि आप इसके बारे में जानना चाहते हैं, तो आप हमारे द्वारा दी गई जानकारी के माध्यम से आसानी से मोर पंख से लड़का होने के उपाय क्या होते हैं। इसके बारे में आसानी से जान सकते हैं तो चलिए जानते हैं, इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी।

वैसे, तो दोस्तों लड़का-लड़की एक समान हैं। फिर भी प्रत्येक माता-पिता चाहते है कि उनकी पहली संतान बेटा पैदा हो। ऐसे में वह तरह-तरह के उपाय करते हैं। जबकि कई लोग बेटी के लिए भी कई तरह के उपाय अपनाते हैं । लेकिन ऐसा बहुत कम लोग करते हैं । लेकिन बेटे की चाहत रखने वाले दुनिया में अनेकों लोग हैं, क्योंकि बेटे वंश को आगे बढ़ाते हैं। इसलिए वह बेटे की चाहत रखते हैं, तो ऐसे ही कुछ तरीके के बारे में हम आपको बताएंगे कि आप किस प्रकार से मोर पंख से लड़का पैंदा कर सकते हैं।

मोर पंख को किसी शुभ योग में ही घर पर लेकर आये अन्यथा आप अपने काम करने में सक्षम नहीं होगें।

1) पुत्र प्राप्ति के लिए शुक्ल पक्ष में पीरियड टाइम आने के 8,10,12,14,16 ,18 दिन यदि आप समागम करेगें तो होने वाला बच्चा पुत्र होगा।

2) इस उपाय को आप pregnant होने के बाद 40 दिन के अन्दर ही आजमायें pregnant होने के 40 दिन बाद यह उपाय काम नहीं करेगा।

3) इस उपाय के लिए 3-4 मोर पंख लें, और पंखो के बीच जो चाँद के आकर का निशान बना है उसे केंची से काटकर अलग कर लें।

4)अब मोर पंख के काटे गए चाँद को बारीक-बारीक टुकडो में काट लें। और इन को गुड में मिलाकर तीन छोटे-छोटे लडडू बना लें।

इन लडडूओं को सफेद गाय (देशी गाय ) के दूध के साथ तीन दिन तक एक-एक करके सुबह जल्दी उठकर स्नान करके खाली खाए। इसे खाने के बाद 3-4 घंटे कुछ ना खाये और तीन दिनों तक गाय के दूध का ही सेवन करें। लेकिन सफेद गाय एक बछड़े (male) की माँ होनी चाहिए। और गाय का बछड़ा जीवित रहना चाहिए। दोस्तों, ऐसा करने से आपको लड़का होने का योग अधिक बन जाता हैं।

नारियल के बीज से पुत्र प्राप्ति।

दोस्तों, आज हम आपको नारियल के बीज से पुत्र प्राप्ति किस प्रकार से होती है के बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे। तो चलिए जानते हैं, नारियल के बीज से पुत्र प्राप्ति के बारे में संपूर्ण जानकारी।

नारियल का बीज भगवान शिव का आशीर्वाद माना जाता है। तथा नारियल का बीज पुत्र प्राप्ति का रूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारियल के बीज का प्रयोग अनेक कार्यों को सिद्ध करने के लिए किया जाता है। अगर सही विधि से नारियल के बीज का प्रयोग किया जाए तो निश्चित ही भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। और भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। और नि:संतान दंपति अथवा पुत्र की कामना करने वाले लोगों को पुत्र की प्राप्ति होती है।

अगर किसी को पुत्र प्राप्ति की इच्छा है तो नारियल के बीज से सोमवार के दिन एक उपाय करें। सोमवार के दिन प्रातः काल जल्दी उठे। इसके पश्चात स्नान आदि से निवृत्त होने के पश्चात साफ-सुथरे कपड़े धारण कर लीजिए। उसके बाद “ओम नमः शिवाय” मंत्र की एक माला का जाप करें।

इसके बाद भगवान शिव जी से अपने मन की बात कहें। इसके बाद नारियल को शिवलिंग के पास अर्पित करना होगा। इसके बाद भगवान शिव के सामने देसी घी का एक दीपक जलाएं और ओम नमः शिवाय मंत्र से भगवान शिव जी की संपूर्ण श्रद्धा भाव से पूजा- अर्चना करें ।

इसके पश्चात नारियल बीज को भगवान शिव के पास रखें। अगर नारियल के अंदर बीज नहीं है तो ऐसी स्थिति में आप सिर्फ नारियल को भी शिवलिंग के पास रख सकते हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार, नारियल और नारियल के बीज को शिवलिंग पर अर्पित करने के महत्व के बारे में बताया गया है। उसके बाद आप शाम के समय नारियल या इसके बीज को गंगाजल के पात्र में डाल दीजिए।

अब आपको अगले दिन यानी कि मंगलवार के दिन नारियल के इस बीज को हनुमान जी का ध्यान करते हुए निहार मुंह गाय के दूध के साथ खा लीजिए। परंतु इस बात का विशेष ध्यान रखें । कि आपको नारियल का बीज सीधा और साबुत ही निगलना होगा। आप नारियल के बीज को ना चबाएं। सोमवार के दिन सुबह इस उपाय को किया जा सकता है। अगर आपने जल्दी में अथवा भूलवश प्रात: पूजा-पाठ आदि कर लिया हैं, तो आप शाम को भी इस प्रयोग को कर सकते हैं।